सच हम नहीं बोलेंगे, तो फिर बोलेगा कौन? – कवि रंजन शर्मा "पक्का बिहारी
🎙️ सच हम नहीं बोलेंगे, तो फिर बोलेगा कौन?
✍️ कवि रंजन शर्मा "पक्का बिहारी"
🎙️ कवि मुंह नहीं खोलेगा, तो फिर खोलेगा कौन?
सच हम नहीं बोलेंगे, तो फिर बोलेगा कौन?
✍️ कलम मेरी बिकाऊ हो जाए, ऐसा मेरा ज़मीर नहीं।
कोई पैसों से ख़रीद ले हमें, ऐसा कोई अमीर नहीं।
काला चिट्ठा नहीं खोलेंगे, तो फिर खोलेगा कौन?
सच हम नहीं बोलेंगे, तो फिर बोलेगा कौन?
✍️ गिरगिट की तरह रंग बदलना, ऐसा मेरा धर्म नहीं।
झूठ को भी सच कह देना, ऐसा मेरा कर्म नहीं।
ज़ुल्म पर ज़ुबां नहीं खोलेंगे, तो फिर खोलेगा कौन?
सच हम नहीं बोलेंगे, तो फिर बोलेगा कौन?
✍️ ईमान-धर्म पर आँच आ जाए, रिश्वत पर नहीं डोलूंगा।
कोई गर्दन पर तलवार रख दे, तब भी मैं सच ही बोलूंगा।
न्याय के तराज़ू नहीं तोलेंगे, तो फिर तोलेगा कौन?
सच हम नहीं बोलेंगे, तो फिर बोलेगा कौन?
✍️ कभी कुरुक्षेत्र में गीता का, उपदेश सुनना होता है।
कभी बाँसुरी वाले हाथों में भी, चक्र-सुदर्शन होता है।
कड़वाहट में मिठास नहीं घोलेंगे, तो फिर घोलेगा कौन?
सच हम नहीं बोलेंगे, तो फिर बोलेगा कौन?
📌 ✍️ कवि रंजन शर्मा "पक्का बिहारी"
📷 Instagram | 🐦 Twitter (X) | ▶️ YouTube
© 2025 कवि रंजन शर्मा "पक्का बिहारी" – सभी अधिकार सुरक्षित।

Comments
Post a Comment