अपनों से बढ़ती दूरी | Bavita Verma की हिंदी कविता | Event.MirchiPlus
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अपनों से बढ़ती दूरी
✍️ Bavita Verma
English Title : Growing Distance From Loved Ones
📖 कविता
अपनों से बढ़ती दूरी
मोबाइल की इस दुनिया में,
लोग अपनों से दूर हो रहे हैं,
हैं मुसाफ़िर सामने फिर भी,
एक-दूसरे को नज़रअंदाज़ कर रहे हैं।
बातें होती हैं वीडियो कॉल पर,
मगर वो एहसास नहीं होता,
सामने बैठकर मिलने जैसा
वो अपनापन नहीं दिखता।
स्टेटस की दुनिया में लोग
अब सिमट से गए हैं,
परिवार के अपनेपन से
धीरे-धीरे दूर हो गए हैं।
चंद मैसेज से अब
हाल पूछा जाता है,
सामने बैठे इंसान को भी
अनदेखा किया जाता है।
बातें अब दिल से नहीं,
टाइप होकर आती हैं,
इमोजी के इस दौर में
सच्ची खुशियाँ कहाँ मिल पाती हैं।
लाइक और कमेंट में रिश्ते
सिमटकर रह गए,
सच्चे लम्हे भी अब
नोटिफिकेशन में बँट गए।
तकनीक ने दुनिया को
बहुत सीमित कर दिया है,
अपनों के दिलों में
फासला भर दिया है।
जब मिलते हैं कभी,
तो वो अपनापन महसूस नहीं होता,
भाग-दौड़ की इस दुनिया में
किसी को अफसोस नहीं होता।
आज के समय में अपनापन
ढूँढना बड़ा अनजाना लगता है,
ये दुनिया नकली मुस्कानों का
दीवाना लगता है।
तकनीक के चलते बच्चे
माता-पिता से दूर होते जा रहे हैं,
इंटरनेट से लगाव बढ़ाकर
रिश्तों से दूरियाँ बना रहे हैं।
सुविधाओं के जाल में
हम उलझ गए ऐसे,
कि अपनों के लिए
वक़्त ही नहीं बचा जैसे।
चलो फिर से अपनों को
थोड़ा वक़्त दें,
सामने मिल-जुलकर
परिवार को खुशियों से भर दें।
फिर से रिश्तों का
वो अपनापन महसूस करें,
हर रिश्ते को सच्चे दिल से
निभाएँ और संजोएँ।
दिल से दिल की दूरी को
अब कम करना होगा,
डिजिटल दुनिया में भी
इंसान बनकर रहना होगा।
📚 Description
अपनों से बढ़ती दूरी Bavita Verma की एक विचारोत्तेजक हिंदी कविता है। यह कविता मोबाइल, इंटरनेट और सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के कारण परिवार और रिश्तों में आती दूरियों को उजागर करती है। साथ ही यह संदेश देती है कि तकनीक का उपयोग करें, लेकिन अपने रिश्तों, परिवार और मानवीय संवेदनाओं को कभी न भूलें।
✍️ रचनाकार: Bavita Verma
📍 शहर: Lucknow
🏛️ राज्य: Uttar Pradesh
Published on: Event.MirchiPlus
Keywords: अपनों से बढ़ती दूरी, Bavita Verma, हिंदी कविता, सामाजिक कविता, परिवार, मोबाइल, इंटरनेट, सोशल मीडिया, रिश्ते, Event.MirchiPlus
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