हकीकत | प्रवीण कुमार सरोहा की कविता | Event.MirchiPlus
📖 हकीकत
Reality
✍️ प्रवीण कुमार सरोहा
ये आदमी बड़ा पॉपुलर है सियासत में ले लो।
खोले जो मुँह ज़रा भी हुकूमत के सामने,
उसको भी अब उठाओ हिरासत में ले लो।
बहुत कर चुके हो तुम ये गलत फैसले मियाँ,
अब कुछ तो फैसले तुम फ़रासत में ले लो।
झूठ इस कदर सँवार के बोलते हैं वो यहाँ,
जैसे कि हर गुनाह नफ़ासत में ले लो।
चमचागिरी का हुनर है इस शख्स में बड़ा,
'सरोहा' इसे भी अब तुम रियासत में ले लो।
📝 रचना परिचय
"हकीकत" समकालीन सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों पर आधारित एक विचारोत्तेजक हिंदी कविता है। इस रचना में रचनाकार प्रवीण कुमार सरोहा ने सत्ता, समाज, न्याय और सत्य के विभिन्न पहलुओं को प्रभावशाली शब्दों में प्रस्तुत किया है। कविता का प्रत्येक शेर वर्तमान समय की वास्तविकताओं पर तीखा व्यंग्य करता है और पाठक को गहराई से सोचने के लिए प्रेरित करता है। यह रचना केवल साहित्यिक अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि समाज का एक सशक्त दर्पण भी है। यदि आप गंभीर, अर्थपूर्ण और समकालीन हिंदी कविता पढ़ना पसंद करते हैं, तो "हकीकत" निश्चित रूप से आपको प्रभावित करेगी।
✅ Copyright
© 2026 प्रवीण कुमार सरोहा
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