खुशियों की खिड़की – सत्य प्रकाश दूबे की हिंदी कविता | Event.MirchiPlus

 


खुशियों की खिड़की

✍️ सत्य प्रकाश दूबे

The Window of Happiness

खुशियों की खिड़की:

मेरे पास भी एक खिड़की है,खुशियों खिड़की।
मगर वो मेरे कमरे में नहीं बल्कि गाँव वाले घर में है।

वहीं खिड़की पे मां चुपचाप खड़ी रहती है,
मेरे लौट आने की आस में जगी रहती है।
पापा उसी खिड़की से मेरी राह निहारतें हैं,
हर आहट में मेरा नाम पुकारतें हैं।

बहन भी राखी लिए उसी खिड़की पर,
घंटों बैठी रहती है नज़रें बिछाकर।
सोचती है शायद इस बार छुट्टी मिल जाए,
भैया अचानक आ जाए, खुशियाँ खिल जाएँ।

लेकिन शहर की दौड़ मुझे बाँधे रखती है,
ज़िम्मेदारियों की डोर आगे खींचती है।
मैं हर बार लौटने का वादा करता हूँ,
और हर बार वक़्त से हार जाता हूँ।

मेरे लिए जन्नत का कोई दरवाज़ा नहीं,
बस वही खिड़की है—जो आज भी मेरी राह देखती है।

✍️ रचनाकार:
सत्य प्रकाश दूबे
📍 Delhi, Delhi

📖 कविता परिचय

खुशियों की खिड़की सत्य प्रकाश दूबे की एक भावपूर्ण हिंदी कविता है। यह कविता उस खिड़की की कहानी कहती है जहाँ माँ, पापा और बहन आज भी अपने प्रिय के लौटने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। गाँव की यादें, परिवार का स्नेह, शहर की ज़िम्मेदारियाँ और अपनों का इंतज़ार—इन सभी भावनाओं को यह कविता सहज और मार्मिक शब्दों में प्रस्तुत करती है।

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