माँ | रूपांशी दीक्षित की भावपूर्ण हिंदी कविता | Event.MirchiPlus
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माँ
✍️ रूपांशी दीक्षित
English Title : Mother
📖 कविता
माँ
तुम आना।
मुझे बारिश पसंद नहीं,
फिर भी बारिश की बूँदों में भीग जाऊँगी,
ताकि महसूस कर सकूँ तुम्हें।
तुम आना,
बारिश बनकर आना।
तुम आना।
हवा बनकर साँसों में समा जाना,
मेरे रोम-रोम को स्पर्श कर जाना,
जिससे पा सकूँ तुम्हारा स्नेह फिर से।
तुम आना,
हवा बनकर।
तुम आना।
नदियों के संग बहकर आना,
मेरी रूह को शीतल कर जाना,
अपनी करुणा और ममता में भिगो लेना मुझे।
तुम आना,
नदिया बनकर।
तुम आना।
एक और जनम ले लेना मेरे लिए,
मेरी कोख में आ जाना।
अधूरी खुशियाँ जी लेना मेरे आँगन में।
बस मेरे जीवन के अंतिम क्षण तक
मेरे साथ रुक जाना।
तुम आना,
मेरी बेटी बनकर।
तुम आना।
📚 Description
माँ रूपांशी दीक्षित की एक हृदयस्पर्शी हिंदी कविता है। इस कविता में माँ के प्रति प्रेम, ममता, विरह, स्मृतियों और पुनर्जन्म की भावनाओं को अत्यंत संवेदनशील शब्दों में व्यक्त किया गया है। यह कविता हर उस व्यक्ति के दिल को छूती है जिसने माँ के स्नेह को महसूस किया है।
✍️ रचनाकार: रूपांशी दीक्षित
📍 शहर: लखनऊ
🏛️ राज्य: उत्तर प्रदेश
Published on: Event.MirchiPlus
Keywords: माँ, रूपांशी दीक्षित, Mother Poem, Maa Kavita, हिंदी कविता, Emotional Poetry, Mother's Love, Event.MirchiPlus
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