मन के भाव | भगवान की भक्ति पर प्रेरणादायक कविता – मंजूषा श्रीवास्तव "मृदुल"

मन के भाव
✍️ मंजूषा श्रीवास्तव "मृदुल"
मन के भाव

मन के भाव बता दो सारे,
डरना मत बेकार में।
सुनते हैं भगवान सभी की,
आ जाओ दरबार में।।

झूठ, कपट सब छोड़ के आओ,
रख दो मन करतार में।
पावन जीवन फलता जाए,
सच्चे प्रभु के प्यार में।।

सुख-दुख दोनों साथ निभाते,
मत पड़ना तकरार में।
दीपक जब-जब जल उठते हैं,
उजियारा संसार में।।

सच्ची श्रद्धा, निर्मल सेवा,
रख अपने व्यवहार में।
मिल जाएगी राह सहज ही,
प्रभु के शुभ उपहार में।।

मन की पीड़ा कह दो खुलकर,
मत झेंपो इजहार में।
करुणाकर पीड़ा हर लेते,
बैठो तो दरबार में।।

"मृदुल" चरण में माथा रखती,
प्रेम भरे सत्कार में।
बिन माँगे झोली भर जाती,
प्रभु जी के दरबार में।।

— © मंजूषा श्रीवास्तव "मृदुल"
मौलिक रचना

लेखिका परिचय

मंजूषा श्रीवास्तव "मृदुल" उत्तर प्रदेश के लखनऊ की निवासी हैं। वे हिंदी साहित्य एवं भक्ति काव्य की सशक्त रचनाकार हैं। उनकी रचनाओं में आध्यात्मिक चेतना, सकारात्मक जीवन-दृष्टि और मानवीय मूल्यों का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है। सरल भाषा और सहज अभिव्यक्ति उनकी कविताओं की विशेषता है।

लेखिका की जानकारी

नाम : मंजूषा श्रीवास्तव "मृदुल"
शहर : लखनऊ
राज्य : उत्तर प्रदेश

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