मेरा मन | शान्ति साहनी की भावपूर्ण हिंदी कविता | Hindi Poem। Live.Mirchiplus
मेरा मन
रचनाकार: शान्ति साहनी
शहर: रामनगर, वाराणसी (उत्तर प्रदेश)
कभी बादल-सा उड़ता है,
कभी तितली बन बहकता है।
कभी किसी की याद में खो जाता,
कभी खुद से ही लड़ता है।
कभी शांति का सागर बन जाए,
कभी तूफ़ानों से भिड़ जाए।
कभी एक दीपक-सा जलता है,
अँधेरों में भी मुस्कुराता है।
कभी बीते कल में उलझा रहता,
कभी सपनों की राह चले।
कभी चुपचाप सब सुन लेता,
कभी खुद से भी कुछ न कहे।
मेरा मन एक रहस्य गहरा,
न थमे, न कुछ बोले मन।
फिर भी कह जाए कितना कुछ अनजाना।
पर जब भी थक जाऊँ जीवन से,
यही मन मुझे फिर से पुकारे।
रचनाकार: शान्ति साहनी
निवास: रामनगर, वाराणसी, उत्तर प्रदेश
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