नारी शक्ति | सीमा मिश्रा की हिंदी कविता | Event.MirchiPlus
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नारी शक्ति
✍️ सीमा मिश्रा
📖 कविता
कैसे नारी शक्ति का हुआ निर्माण ।
कैसे मिला प्रकृति का उसको वरदान ।
सुनो जग वालों कैसे बनी नारी महान।
कैसे नारी शक्ति का हुआ निर्माण ।
शिव के अंतर से निकली शक्ति।
जिसके प्रभाव से डोली यह धरती।
सूरज ने तपिश दी, चंद्रमा ने कशिश दी।
कलियों से ओढ़ लज्जा का आवरण।
भौरों और फूलों से पाया आकर्षण।
सिखाया धरा ने गर्भ में ढोना भार।
झरनों ने दिया नैनों को आंसुओं की धार।
सहनशीलता से बटोरे रिश्तो के तार तार।
पक्षियों ने सिखाया बनाना घर बार।
आंचल में मातृत्व की नदियाँ हैं बहती।
आंखों से करुणा की धूप है निखरती।
केशों की घनी छांव में जो पाए शांति और सुकून।
उसी बेईमान इंसान पर चढ़ा यह कैसा जुनून।
गर्भ में ही उसकी छीनी जाती सांसे।
लज्जित क्यों हो रही नारी इस जहां से।
निकट पहुंच गया इस जग का विध्वंश।
नारी बिना पुरुष कैसे चलाएगा अपना वंश।
📚 Description
नारी शक्ति सीमा मिश्रा की एक प्रेरणादायक हिंदी कविता है। इस कविता में नारी के सृजन, मातृत्व, सहनशीलता, करुणा और सम्मान का भावपूर्ण चित्रण किया गया है। यह रचना समाज में नारी के महत्व और उसके सम्मान का सशक्त संदेश देती है।
✍️ रचनाकार: सीमा मिश्रा
📍 शहर: Nagpur
🏛️ राज्य: Maharashtra
Published on: Event.MirchiPlus
Keywords: नारी शक्ति, सीमा मिश्रा, महिला सशक्तिकरण, नारी सम्मान, हिंदी कविता, Event.MirchiPlus
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