तुझ बिन निकले प्राण हो | कवि मुकेश पटेल की हिंदी कविता | Event.MirchiPlus


 

तुझ बिन निकले प्राण हो

✍️ कवि मुकेश पटेल

English Title : Tujh Bin Nikale Pran Ho

📖 कविता

तुझ बिन निकले प्राण हो....

तुम कहती हो, क्या लगती हूँ,
जब कहती हो, क्या लगती हूँ,
मैं कहता मेरी जान हो,
तुम कहती हो -
जब कहती -

मैं कान्हा तू मेरी राधा,
तुम बिन तो मैं अब तक आधा,
जीवन का संयोग ना जाना - 2
तुझ बिन निकले प्राण हो,
तुम कहती हो --

पढ़ने को जब पुस्तक खोलूं,
याद किया सबकुछ मैं भूलूँ,
कलम किताबैं छूटी अब तो -2
मुश्किल में है प्राण हो,
तुम कहती हो--
जब कहती हो--

जी नहीं लगता तुम बिन अब तो,
सखियाँ बनाती बाते अब तो,
तोड़ के सारे बंधन आजा -2
जोड़ो संग मेरे नाम हो,
तुम कहती हो--
जब कहती हो--

— कवि मुकेश पटेल

📚 Description

तुझ बिन निकले प्राण हो कवि मुकेश पटेल की एक भावपूर्ण हिंदी प्रेम कविता है। इस कविता में प्रेम, विरह, राधा-कृष्ण की अनुभूति, यादों की कसक और मिलन की चाह को सहज एवं भावनात्मक शब्दों में व्यक्त किया गया है। प्रेम रस से भरपूर यह कविता पाठकों के हृदय को स्पर्श करती है।

✍️ रचनाकार: कवि मुकेश पटेल
📍 शहर: मधेपुरा
🏛️ राज्य: बिहार
📞 मोबाइल: 7991172954

Published on: Event.MirchiPlus

Keywords: तुझ बिन निकले प्राण हो, कवि मुकेश पटेल, हिंदी कविता, प्रेम कविता, राधा कृष्ण, विरह कविता, Love Poetry, Romantic Poetry, Event.MirchiPlus

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