लखनऊ काव्य महोत्सव “शाम-ए-अवध” में छाए कवि रंजन शर्मा ‘पक्का बिहारी’
लखनऊ काव्य महोत्सव “शाम-ए-अवध” में छाए मुंगेर के कवि रंजन शर्मा ‘पक्का बिहारी’
लखनऊ।
सूर्यनारायण फाउंडेशन, लखनऊ के तत्वावधान में आयोजित लखनऊ काव्य महोत्सव “शाम-ए-अवध” का भव्य एवं गरिमामयी आयोजन मुंशी पुलिया, लखनऊ में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। साहित्य, संस्कृति और काव्य रस से सराबोर इस संध्या ने श्रोताओं को भावनाओं के एक अद्भुत संसार में डुबो दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि, दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री गिरीश चंद्र मिश्र एवं साहित्य भूषण कमलेश मौर्य ‘मृदु’ द्वारा माँ शारदे के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन कर किया गया।
इस साहित्यिक आयोजन के संस्थापक अमित श्रीवास्तव के मार्गदर्शन एवं अध्यक्ष राखी श्रीवास्तव की अध्यक्षता में कार्यक्रम अत्यंत सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ। मंच संचालन की जिम्मेदारी संजय शर्मा ने कुशलता से निभाई, वहीं उपाध्यक्ष सुधा सिंह की सक्रिय भूमिका कार्यक्रम की सफलता में सराहनीय रही।
अपने संबोधन में साहित्य भूषण कमलेश मौर्य ‘मृदु’ ने कहा कि “शाम-ए-अवध” जैसे आयोजन साहित्य को जन-जन तक पहुँचाने का सशक्त माध्यम हैं और यह कार्यक्रम हर दृष्टि से सफल रहा।
कार्यक्रम की सबसे विशेष और चर्चित प्रस्तुति मुंगेर, बिहार से पधारे चर्चित कवि रंजन शर्मा ‘पक्का बिहारी’ की रही। मंच पर आते ही उनके आत्मविश्वास और बेबाक शैली ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
उन्होंने जब अपनी व्यंग्यात्मक एवं यथार्थ से जुड़ी कविता —
“कुत्ते-बिल्ली सब घर में रहें,
बस दिक्कत है माँ-बाप से”
का पाठ किया, तो पूरा सभागार ठहाकों और तालियों से गूंज उठा।
कविता समाप्त होते ही श्रोताओं ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ कवि रंजन शर्मा को भरपूर प्रेम दिया। उनकी प्रस्तुति ने न केवल मनोरंजन किया, बल्कि समाज के बदलते मूल्यों पर गहरी चोट भी की। यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि रंजन शर्मा ने अपनी शानदार प्रस्तुति से पूरी महफिल ही लूट ली।
कार्यक्रम का समापन साहित्य, सौहार्द और सांस्कृतिक एकता के संदेश के साथ हुआ, जो उपस्थित श्रोताओं के मन में लंबे समय तक स्मरणीय रहेगा।

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