होके मगरूर भी आऊंगा प्रेम कविता – कवि रंजन शर्मा पक्का बिहारी
🌹 होके मगरूर भी आऊंगा 🌹 होके मगरूर भी आऊंगा, मैं मिलने दूर भी आऊंगा। 💔 हुआ बदनाम तेरे संग तो, होके मशहूर भी आऊंगा। 🎓 गूगल मीट से जुड़कर, मिले कॉलेज की महफ़िल में। 📍 दुबारा जब बुलाओगी, वहीं फतेहपुर भी आऊंगा। 🌪️ डर के दुनिया से तुमने, दिल को मेरा तोड़ दिया तो क्या। 🔥 साँस जब तक चलेगी, होके चकनाचूर भी आऊंगा। 🌙 वो चौदह फरवरी की रात, जब-जब याद आएगी। 🌸 मुरादें पूरी करने को, मुरादीपुर भी आऊंगा। 📖 कभी जो नाम पुकारा था, वो अब भी ज़िंदा रहता है। ❤️ तेरी एक सिसकी सुनकर, होके मजबूर भी आऊंगा। 🚫 सोशल मीडिया पर ब्लॉक हुआ, तो क्या हुआ रंजन। 🛤️ तेरे ग़म की गलियों से, मैं बे-क़सूर भी आऊंगा। 🔥 तेरी तस्वीर जलाकर भी, तेरे ख़्वाबों से जलता हूँ। 💔 बिना तेरे लेकर दिल को, बे-सबूर भी आऊंगा। ✍️ रंजन शर्मा ‘पक्का बिहारी’ 📍 मुंगेर, बिहार