किताब से गुलाब तक । 🌹 रोज डे स्पेशल। कवि रंजन शर्मा

 


🌹📖 किताब से गुलाब तक 📖🌹

कॉलेज की मोहब्बत अक्सर किताबों के बहाने शुरू होती है,
फिर वो गुलाब बन जाती है…
और ज़िंदगी कब तन्हाई में बदल जाए, पता ही नहीं चलता।
पेश है मेरी एक हास्य-व्यंग्य शायरी



🌸 कॉलेज में वो मिली थीं , किताब के बहाने।
🌹 मिलती थी रोज डे पर , गुलाब के बहाने।

💔 वो छोड़ गई तो मैं भी , हकीम बन गया।
🤭 आती है मिलने हाजमा , खराब के बहाने।

😄 हा कब्ज की बिमारी में , नब्ज हूं दबाता।
❓ मैं पूछता सवाल हूं , जवाब के बहाने।

🌍 दुनिया की भीड़ में भी मैं अकेला रह गया।
🍷 यारों से नहीं मिलते अब , शराब के बहाने।



✍️ कवि रंजन शर्मा
🌹 #हास्य_शायरी   📖 #किताब_से_गुलाब_तक   ✨ #Poetry

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